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यूपी को केंद्र नहींदे रहा पिछड़ों के वजीफे का पैसा
ग्यारह साल से हर साल धीरे-धीरे केंद्र सरकार पर बढ़ रही पिछड़ों की छात्रवृत्ति की रकम 2087.81 करोड़ पहुंच गई। आधिकारिक स्तर पर हुई बैठकों के बाद भी इसके भुगतान की कोई उम्मीद न होते देख मुख्यमंत्री मायावती ने सितंबर में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा तो केंद्र सरकार ने महज 13.49 करोड़ की राशि प्रदेश को भेजी। अब भी 2074 करोड़ रुपया प्रदेश सरकार का केंद्र पर अवशेष है जिसके लिए फिर प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री से कहा है कि अतिरिक्त व्यय भार आने के कारण राज्य सरकार की अन्य योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि पिछड़े वर्ग के कक्षा एक से दस तक के छात्रों को छात्रवृत्ति के तौर पर केंद्र और प्रदेश सरकार पर 50-50 फीसदी राशि के भुगतान की जिम्मेदारी है जबकि कक्षा दस से ऊपर के छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत राशि दिए जाने का प्रावधान है। बकाए के भुगतान को लेकर 25 जनवरी को प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया है कि केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार पिछड़े वर्ग के कक्षा एक से दस तक के छात्रों को वर्ष 1998-99 से छात्रवृत्ति की योजना क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2007-08 से कक्षा दस से ऊपर के छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि का भुगतान किया जा रहा है। सितंबर तक केंद्र सरकार पर अवशेष के तौर पर 2087.81 करोड़ की राशि थी जिसे उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद राज्य सरकार को मात्र 13.49 करोड़ की दूसरी किश्त प्राप्त हुई। शेष राशि अब भी बकाया है। पत्र में उल्लेख है कि इस वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार को 538.09 करोड़ देने थे लेकिन 38.25 करोड़ ही प्राप्त हो सके हैं जो कुल मांग का 7.10 प्रतिशत है जबकि इस वित्तीय वर्ष में लगभग ढाई माह का ही समय रह गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि नवंबर में हुई बैठक में केंद्र सरकार द्वारा विभाग के बजट कम होने की बात कही गई। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि यदि विभाग का बजट कम है तो इसे बढ़ाया जाय और अगले वर्ष मांगी गई राशि की बजट व्यवस्था की जानी चाहिए।
Reference: jagran
बहुजन समाज पार्टी