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राहुल की कांग्रेस ने लागू किया राज ठाकरे का देश को तोड़ने बाला एजेंडा, महाराष्ट्रा में टॅक्सी चलाने का परमिट किसी भी उत्तर भारतीय को नही मिलेगा

Posted by MKB on January 21st, 2010

मुंबई कांग्रेस नीत महाराष्ट्र सरकार भी अब राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की राह चल पड़ी है। सरकार ने फैसला किया है कि मुंबई में टैक्सीचलाने का परमिट अब उन्हीं ड्राइवरों को मिलेगा, जो 15 साल से मुंबई में रह रहे हैं और उन्हें मराठी बोलनी, पढ़नी और लिखनी आती है। मंुंबई में करीब 55 हजार टैक्सियां पंजीकृत हैं। इनमें 24 हजार टैक्सियों के परमिट कई वर्षो से नवीकृत नहीं किए गए हैं। अब सरकार इन्हें धीरे-धीरे नवीकृत करना चाहती है। मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण का कहना है कि नए परमिट उन्हीं टैक्सीचालकों को दिए जाएंगे जिन्हें मराठी बोलना, लिखना और पढ़ना ठीक से आता हो। गौरतलब है कि मुंबई के टैक्सीचालकों में 90 प्रतिशत उत्तर प्रदेश के मूलनिवासी हैं। इनमें भी अधिक संख्या उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ से आए लोगों की है। इसके बाद वाराणसी, जौनपुर, इलाहाबाद, झारखंड और बिहार से आए लोग हैं। इसलिए महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले का सीधा असर इसी वर्ग पर पड़ेगा। स्वयं भदोही जनपद के रहने वाले भारतीय टैक्सीचालक संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार मिश्रा का मानना है कि राज्य सरकार का यह फैसला शिवसेना और मनसे जैसे दलों के राजनीतिक दबाव का परिणाम है। मराठी वोटबैंक को खुश करने के लिए कांग्रेसनीत सरकार यह निर्णय कर रही है। जबकि मुंबई टैक्सी यूनियन के महामंत्री एएल क्वाड्रोस सरकार के इस निर्णय को अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहते हैं कि इस प्रकार का राजनीतिक निर्णय कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता । क्वाड्रोस के अनुसार मुंबई एक बहुभाषी शहर है। यहां टैक्सीचालकों से यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वे टैक्सी चलाने के लिए मराठी लिखने और बोलने का अभ्यास करने जाएं। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर अपनी तुलना मनसे से किए जाने को गलत मानती है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अनंत गाडगिल कहते हैं कि मनसे सिर्फ मराठियों की बात करती है। जबकि स्थानीय लोगों में महाराष्ट्र मूल के लोगों के अलावा दूसरे राज्यों से आए ऐसे लोग भी शामिल हैं जो यहां बरसों से रह रहे हैं और उन्हें मराठी अच्छी तरह आती है। मनसे के प्रवक्ता डा. वागीश सारस्वत ने राज्य सरकार के निर्णय को पार्टी की जीत बताते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि हमारी नीति सही थी। अब सरकार स्थानीय निकाय चुनावों को सामने देख उन्हीं नीतियों पर चलकर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है।
Reference: Jagran

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