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	<title>बहुजन समाज पार्टी</title>
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	<description>सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय</description>
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		<title>मायावती सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति सही: सुप्रीम कोर्ट</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Sep 2010 10:55:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
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		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>
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		<description><![CDATA[कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी को आगरा से जोड़ने वाली यमुना एक्सप्रेस वे परियोजना के साथ टाउनशिप परियोजनाओं के विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति को बुधवार को सही ठहराया। 
न्यायमूर्ति वी एस सिरपुरकर और न्यायमूर्ति सिरियाक जोसफ की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली कुछ किसानों की [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी को आगरा से जोड़ने वाली यमुना एक्सप्रेस वे परियोजना के साथ टाउनशिप परियोजनाओं के विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति को बुधवार को सही ठहराया। </p>
<p>न्यायमूर्ति वी एस सिरपुरकर और न्यायमूर्ति सिरियाक जोसफ की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली कुछ किसानों की अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने भी मायावती सरकार की नीति को सही ठहराया था। कोर्ट किसानों की उस दलील से सहमत नहीं हुआ, जिसमें कहा गया कि भूमि अधिग्रहण निजी उद्देश्य से किया गया न कि सार्वजनिक उद्देश्य से।<br />
Reference: Jagran</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र के बराबर छठा वेतनमान</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Sep 2010 06:21:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलित किसानों को नई पुनर्वास नीति के रूप में सौगात देने के बाद अब राज्य सरकार ने कर्मचारियों पर नजर-ए-इनायत की है। राज्य मंत्रिपरिषद ने शनिवार को राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर छठां वेतनमान देने का फैसला किया है। इस फैसले से राज्य के [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलित किसानों को नई पुनर्वास नीति के रूप में सौगात देने के बाद अब राज्य सरकार ने कर्मचारियों पर नजर-ए-इनायत की है। राज्य मंत्रिपरिषद ने शनिवार को राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर छठां वेतनमान देने का फैसला किया है। इस फैसले से राज्य के लगभग तीन लाख चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लाभान्वित होंगे। छठे वेतन आयोग की सिफारिश के क्रम में ही सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के सभी पदों की नई भर्ती बंद करने का भी निर्णय किया है। मंत्रिपरिषद ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, नागर निकायों, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में नियुक्त व कार्यरत सभी वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नौकरी पक्की करते हुए उन्हें विनियमित करने का भी फैसला किया है। इस निर्णय का लाभ प्रदेश के 13,000 वर्कचार्ज और 13,800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलेगा। मंत्रिपरिषद की बैठक में किये गए फैसलों की जानकारी प्रमुख सचिव सूचना विजय शंकर पांडेय ने दी। </p>
<p>चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र के समान छठा वेतनमान : मंत्रिपरिषद ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल करते हुए राज्य के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तरह 5200-20,200 रुपये वेतन बैंड और 1800 रुपये ग्रेड पे देने का फैसला किया है। इस फैसले का फायदा प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के तीन लाख कर्मचारियों को मिलेगा। इसकी वजह से सरकार पर सालाना लगभग 350 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ बढे़गा। फिलहाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 रुपये का वेतन बैंड और 1300 रुपये ग्रेड पे रिप्लेसमेंट के तौर पर दिया जा रहा है। वेतन समिति ने सिफारिश की थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4440-7440 रुपये का वेतन बैंड दिया जाए और उनकी ग्रेड पे को बढ़ाकर 1300 से बढ़ाकर 1400 रुपये कर दिया जाए। वहीं इनके ऊपर वाले वेतन में तैनात तकरीबन 30,000 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तरह ही 5200-20,200 का वेतन बैंड व ग्रेड पे दिया जाए। मंत्रिपरिषद ने दोनों श्रेणियों को एक ही वेतन बैंड व ग्रेड पे में शामिल करने का फैसला किया है। सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के सभी पदों की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रमुख सचिव सूचना ने बताया कि नई भर्ती पर रोक का फैसला छठे वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत होगी, वहां उनकी व्यवस्था आउटसोर्सिंग के जरिये की जाएगी। </p>
<p>वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नौकरी पक्की : </p>
<p>मंत्रिपरिषद ने राज्य के सभी विभागों, नागर निकायों, उप्र आवास एवं विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों में 29 जून 1991 से पहले नियुक्त/कार्यरत सभी वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए पद सृजित करते हुए उन्हें विनियमित करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि शासन ने 29 जून 1991 के बाद वर्कचार्ज और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियो की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया था। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न विभागों में तकरीबन 10,000 वर्कचार्ज व 9800 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ऐसे हैं जो 29 जून 1991 से पहले से काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को विनियमित करने पर सरकार पर सालाना लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार पड़ेगा। नागर निकायों में लगभग 3,000 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी तथा आवास विकास परिषद व विकास प्राधिकरणों में लगभग 3,000 वर्कचार्ज और 1,000 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी काम कर रहे थे। नागर निकायों, आवास विकास परिषद और विकास प्राधिकरणों में तैनात वर्कचार्ज व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विनियमित करने पर सालाना 60 करोड़ रुपये और खर्च होंगे। यह व्ययभार निकायों, आवास विकास परिषद व प्राधिकरणों को ही वहन करना पड़ेगा। </p>
<p>कृषि विश्वविद्यालयों व एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट इलाहाबाद के शिक्षकों को छठा वेतनमान : </p>
<p>मंत्रिपरिषद ने मेरठ, फैजाबाद और कानपुर के तीन कृषि विश्वविद्यालयों और इलाहाबाद के एग्रीकल्चरल इन्स्टीट्यूट के शिक्षकों व समकक्षीय संवर्ग को छठा वेतनमान दिये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वेतनमानों का पुनरीक्षण भारत सरकार के 13 मार्च 2009 के पत्र के अनुसार एक जनवरी 2006 से होगा और अन्य भत्ते उसी तरह दिये जाएंगे जैसे कि राजकीय कर्मचारियों के लिए स्वीकृत किये गए हैं। वेतनमानों का पुनरीक्षण उन्हीं मामलों में स्वीकृत किया जाएगा जिनमें एक जनवरी 2006 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार वेतनमान दिया जा रहा था। शिक्षकों को एक जनवरी 2006 से पुनरीक्षित वेतनमान का काल्पनिक तथा एक दिसम्बर 2008 से वास्तविक लाभ दिया जाएगा। उन्हें पहली जनवरी 2006 से 30 नवंबर 2008 तक के पुनरीक्षित वेतनमान के एरियर का भुगतान तभी होगा जब आईसीएआर एक जनवरी 2006 से 31 मार्च 2010 तक की अवधि के एरियर के व्ययभार का 80 प्रतिशत वहन करने की सहमति देते हुए निर्धारित धनराशि जारी कर दे। एरियर की शेष धनराशि में से आधे का भुगतान वर्ष 2010-11 में और बाकी का 2011-12 में किया जाएगा। </p>
<p>राज्य कर्मचारियों को लागू वेतन के आधार पर अग्रिम देने का फैसला : मंत्रिपरिषद ने राज्य कर्मचारियों को उप्र वेतन समिति-2008 की संस्तुतियों के क्रम में लागू वेतन संरचना में वेतन के आधार पर मकान बनाने व खरीदने, उसकी मरम्मत व विस्तार करने, वाहन तथा कम्प्यूटर खरीदने के लिए अग्रिम अनुमन्य करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के अनुसार मकान बनाने या खरीदने के लिए वेतन बैंड में 34 माह का वेतन या अधिकतम 7.50 लाख रुपये या भवन की लागत, जो भी कम हो, मंजूर किया गया है। मकान की मरम्मत या विस्तार के लिए वेतन बैंड में 34 माह का वेतन या अधिकतम 1.80 लाख रुपये या विस्तार की लागत, जो भी कम हो, स्वीकृत किया जाएगा। कार के लिए वेतन बैंड में 19,530 रुपये या उससे अधिक, मोटर साइकिल या स्कूटर के लिए 8560 रुपये या उससे अधिक, मोपेड के लिए 5060 रुपये या उससे अधिक, साइकिल के लिए वेतन बैंड में 9300 रुपये या उससे कम और कम्प्यूटर के लिए 14880 रुपये या उससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को ही अग्रिम मंजूर होगा। </p>
<p>कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ : मंत्रिपरिषद ने एक और फैसला करते हुए पहली अप्रैल 2005 से पहले राज्य सरकार के अधीन किसी पेंशनयुक्त सेवा संवर्ग में नियुक्त ऐसे कर्मचारियों को, जो एक अप्रैल 2005 या उसके बाद राज्य सरकार के अधीन किसी दूसरी पेंशनयुक्त सेवा में नियुक्त हुए हों, उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिये जाने का फैसला किया है। इस फैसले का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो पहली अप्रैल से पहले राज्य सरकार या उसके अधीन किसी स्वायत्तशासी संस्था या सहायता प्राप्त शिक्षण संस्था में कार्यरत थे और इस सेवा से कार्यमुक्त होकर या त्यागपत्र देकर पहली अप्रैल 2005 के बाद राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पेंशनयुक्त सेवा में नियुक्त हुए हों। इस मुद्दे पर अभी तक भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। गौरतलब है कि पहली अप्रैल 2005 से प्रदेश में नई अंशदायी पेंशन योजना लागू है।<br />
Reference: Jagran</p>
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		<title>लखनऊ के विकास पर खर्च होंगे 456 करोड़</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Sep 2010 06:19:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[राजधानी लखनऊ के विकास 456 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तैयारी लखनऊ को आदर्श शहर बनाने की है। दिल्ली के पालिका बाजार की तर्ज पर सरोजनी नायडू पार्क में पार्किंग की व्यवस्था होगी। कैसरबाग सब्जी मण्डी में बहुमंजिला पार्किंग, दयानिधान पार्क में पार्किंग, भोपाल हाउस पार्किंग का सौन्दर्यीकरण और सिविल कोर्ट के पास पार्किंग की व्यवस्था [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>राजधानी लखनऊ के विकास 456 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तैयारी लखनऊ को आदर्श शहर बनाने की है। दिल्ली के पालिका बाजार की तर्ज पर सरोजनी नायडू पार्क में पार्किंग की व्यवस्था होगी। कैसरबाग सब्जी मण्डी में बहुमंजिला पार्किंग, दयानिधान पार्क में पार्किंग, भोपाल हाउस पार्किंग का सौन्दर्यीकरण और सिविल कोर्ट के पास पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। यही नहीं शहर की पेयजल, विद्युत, सीवर, सड़क, पार्किंग, बाजार और पार्को की व्यवस्था को भी सुधारा जायेगा। </p>
<p>मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को उप्र राज्य सलाहकार परिषद की सिफारिश पर इन योजनाओं के लिए 456 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए कहा कि राजधानी होने के कारण लखनऊ में अच्छी से अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे यहां के नगरवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने विकास कार्यो को पूरी गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यो के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। शिकायत मिलने पर दोषी अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी। </p>
<p>लखनऊ में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जेएनएनयूआरएम के तहत निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट परियोजना का कार्य हर हाल में इस माह के अन्त तक पूरा कर लिया जाये। विभिन्न पेयजल योजनाओं के कार्य को भी मार्च 2011 से पहले पूरे कर लिए जाएं। लखनऊ शहर की 20 साल की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए घने व्यवसायिक क्षेत्रों में समुचित पार्किंग की व्यवस्था की जाये। उन्होंने हजरतगंज के सौन्दर्यीकरण तथा गोमती रिवर फ्रंट के विकास के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। </p>
<p>इससे पूर्व उप्र राज्य सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सतीश चन्द्र मिश्र ने एनेक्सी सभाकक्ष में बैठक कर लखनऊ के समेकित विकास के लिए चल रही विभिन्न परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की।<br />
Reference: Jagran</p>
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		<title>बजाज हिंदुस्तान की बिजली से रोशन होगा उत्तर प्रदेश</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Sep 2010 06:10:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[बजाज हिंदुस्तान ग्रुप अब चीनी के साथ बिजली का भी उत्पादन करेगा। कंपनी ने उत्तर प्रदेश में छह पावर प्लांट लगाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इसके लिए कंपनी को पावर कॉरपोरेशन से सहमति भी मिल गई है। इन प्लांटों से 2,430 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बजाज हिंदुस्तान ग्रुप की उत्तर प्रदेश [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बजाज हिंदुस्तान ग्रुप अब चीनी के साथ बिजली का भी उत्पादन करेगा। कंपनी ने उत्तर प्रदेश में छह पावर प्लांट लगाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इसके लिए कंपनी को पावर कॉरपोरेशन से सहमति भी मिल गई है। इन प्लांटों से 2,430 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बजाज हिंदुस्तान ग्रुप की उत्तर प्रदेश में 16 चीनी मिले हैं। कंपनी ने प्रदेश सरकार से पावर प्लांट लगाने अनुमति मांगी थी जिसके लिए सरकार तैयार है। इस बारे में कंपनी और राज्य सरकार के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है। अब प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। पावर कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (पर्सनल) नंदलाल ने बताया कि बजाज हिंदुस्तान 90-90 मेगावाट के पांच पावर प्लांट चीनी मिलों में लगाएगी। इन बिजली घरों से 2011 के अंत तक बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। कंपनी पीलीभीत के बरखेड़ा, शाहजहांपुर के मकसूदापुर, लखीमपुर के खंभरखेड़ा, बलरामपुर के उतरैला और गोंडा के कुंदरकी चीनी मिलों में यह प्लांट लगाएगी। इन बिजली संयंत्रों के निर्माण पर बजाज दो हजार करोड़ रुपये निवेश कर रही है। छठा पावर प्लांट ललितपुर (झांसी) में 1980 मेगावाट का लगेगा। इससे 2014 तक बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस पर कंपनी 12 हजार करोड़ रुपये निवेश कर रही है। इस प्लांट के लिए प्रदेश सरकार 1500 एकड़ भूमि मुहैया करा रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी बिजली उत्पादित करके पावर कॉरपोरेशन को देगी। उत्पादन शुरू होने से प्रदेश को बिजली संकट से राहत मिलेगी। बजाज से एमओयू होने के बाद बिरला सहित कई अन्य कंपनियां भी प्रदेश में पावर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही हैं।<br />
Reference: Jagran</p>
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		<title>मुख्यमंत्री मायावती ने की उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए नयी पुनर्वास नीति की घोषणा</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 11:28:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[ यमुना एक्सप्रेस वे के लिए हुए भूमि अधिग्रहण से आंदोलित किसानों के उग्र तेवर को देखते हुए राज्य सरकार ने अधिग्रहण से प्रभावित काश्तकारों के लिए शुक्रवार को नयी पुनर्वास नीति की घोषणा की। नयी पुनर्वास नीति में किसानों को जमीन के मुआवजे के अलावा 33 साल तक 20 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p> यमुना एक्सप्रेस वे के लिए हुए भूमि अधिग्रहण से आंदोलित किसानों के उग्र तेवर को देखते हुए राज्य सरकार ने अधिग्रहण से प्रभावित काश्तकारों के लिए शुक्रवार को नयी पुनर्वास नीति की घोषणा की। नयी पुनर्वास नीति में किसानों को जमीन के मुआवजे के अलावा 33 साल तक 20 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से वार्षिकी के भुगतान की व्यवस्था की गई है। किसानों को सालाना मिलने वाली इस धनराशि में हर साल 600 रुपये प्रति एकड़ की दर से निश्चित वृद्धि की जाएगी, जो जुलाई महीने में मिलेगी। यदि कोई किसान वार्षिकी नहीं लेना चाहता है, तो उसे एकमुश्त 2.40 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से पुनर्वास अनुदान दिया जाएगा। भूमि का अधिग्रहण किसी कंपनी के लिए किये जाने पर प्रभावित किसान को अपनी जमीन की कीमत की 25 प्रतिशत धनराशि के बराबर कंपनी के शेयर हासिल करने का विकल्प दिया जाएगा। राज्य सरकार ने अपनी नयी पुनर्वास नीति को देश की सबसे प्रगतिशील नीति बताया है। </p>
<p>भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के पुनर्वास के बारे में मुख्यमंत्री मायावती द्वारा लिये गए इन फैसलों की जानकारी शुक्रवार को मंत्रिमंडलीय सचिव शशांक शेखर सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि विकास सम्बंधी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि में से सात प्रतिशत जमीन प्रभावित किसानों को आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित की जाएगी। आवास के लिए किसानों को आवंटित की जाने वाली जमीन का न्यूनतम क्षेत्रफल 120 वर्ग मीटर होगा, जबकि अधिकतम क्षेत्रफल संबंधित प्राधिकरण तय करेगा। प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत भूमि पर आवासीय योजना विकसित किये जाने पर अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को भूखंडों के आवंटन में 17.5 फीसदी आरक्षण भी दिया जाएगा। </p>
<p>मंत्रिमंडलीय सचिव ने कहा कि मायावती सरकार व बसपा किसानों की जमीन जबर्दस्ती अधिग्रहीत किये जाने के सख्त खिलाफ है। भूमि अधिग्रहण के कारण भूमिहीन हो रहे किसानों के प्रत्येक परिवार को पांच साल तक कृषि मजदूरी के बराबर 1.85 लाख रुपये एकमुश्त दिये जाने के आदेश गत 17 अगस्त को जारी किये जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलीगढ़ और आगरा के किसानों की जमीन सम्बंधी समस्या का सरकार ने पहले ही समाधान कर दिया है। इन किसानों को समुचित मुआवजा मिलने के बाद वे मान गए थे लेकिन सरकार विरोधी तत्वों ने उन्हें भड़का कर कानून व्यवस्था खराब करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 में संशोधन किये जाने की लम्बे समय से मांग करती आ रही हैं, लेकिन किसानों की विरोधी और उद्योगपतियों के हित साधने वाली केंद्र सरकार इस गंभीर समस्या से आंखें चुरा रही है। भूमि अर्जन अधिनियम के जरिये भूमिहीन किये जा रहे किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने और नक्सलवाद का दामन थामने के लिए मजबूर किये जा रहे हैं। </p>
<p>उप्र की पुनर्वास नीति हरियाणा से बेहतर : मुख्यमंत्री </p>
<p>राज्य सरकार ने शुक्रवार को घोषित अपनी नयी पुनर्वास नीति को देश की सबसे प्रगतिशील नीति बताया है। मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को पुनर्वासित करने के मामले में कांग्रेस पार्टी हरियाणा की मिसाल दिया करती है, लेकिन उत्तर प्रदेश ने किसानों के हित में उससे बेहतर नीति बनायी है। </p>
<p>मंत्रिमंडलीय सचिव ने कहा कि हरियाणा में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित प्रत्येक किसान को प्रतिकर के अलावा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से वार्षिकी देने की व्यवस्था है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 20 हजार रुपये तय की गई है। हरियाणा में वार्षिकी में हर साल 500 रुपये प्रति एकड़ की दर से बढ़ोतरी की व्यवस्था है, जबकि यहां यह दर 600 रुपये है। हरियाणा में वार्षिकी न लेने वाले किसानों के लिए पुनर्वास अनुदान के एकमुश्त भुगतान का भी कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन उप्र में यह व्यवस्था की गई है। हरियाणा में कंपनी के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में प्रभावित किसानो को शेयर देने का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। आवासीय परियोजनाओं के मामलों में भी हरियाणा में किसानों को आरक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं है।<br />
Reference: jagran</p>
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		<title>यूपी में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी होंगे स्थाई</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 11:17:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1991 से पहले प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी और अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 27 हजार कर्मचारी लाभांवित होंगे। 
मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में शनिवार को यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1991 से पहले प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी और अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 27 हजार कर्मचारी लाभांवित होंगे। </p>
<p>मुख्यमंत्री मायावती की अध्यक्षता में शनिवार को यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा अन्य विभागों में वर्ष 1991 से पहले भर्ती हुए दैनिक वेतन भोगी तथा अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई किए जाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना विजय शंकर पांडेय ने सरकार द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि सरकार के इस निर्णय से 26,800 दैनिक वेतन भोग और अस्थाई कर्मचारी लाभांवित होंगे। </p>
<p>उन्होंने बताया कि शनिवार को लिए गए इस फैसले से राज्य सरकार पर 80 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। पांडेय ने बताया कि इन अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने के लिए अतिरिक्त पदों का सृजन किया जाएगा। </p>
<p>प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में दस हजार अस्थाई और 9,800 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी वर्ष 1991 के पहले से कार्यरत हैं, जबकि 3,000 वेतन भोगी कर्मचारी स्थानीय निकायों में तथा चार हजार दैनिक भोगी व अस्थाई कर्मचारी आवास विकास परिषद और विभिन्न विकास प्राधिकरणों मे काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य सराकर पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पडे़गा, जबकि स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा प्राधिकरणों पर 60 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। </p>
<p>उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय, आवास विकास परिषद तथा प्राधिकरणों मे कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को न्यायालय के आदेश से स्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के समान वेतन दिया जा रहा है। पांडेय ने बताया कि अस्थाई कर्मचारियों द्वारा पिछले दशकों से स्थाई किए जाने की मांग को लेकर आए दिन धरना-प्रदर्शन किए जा रहे थे और उन्हें स्थाई करने के लिए न्यायालयों में भी हजारों मामले विचाराधीन थे जिसके कारण न केवल कर्मचारियों आर्थिक बोझ आ रहा था, बल्कि सरकार को इस पर काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा था। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों को अस्थाई से स्थाई करने की समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने 29 जून 1991 से दैनिक वेतन भोगी और वर्कचार्ज कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई थी।<br />
Reference: Jagran</p>
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		<title>अमेठी जिला विवाद मामले में बुधवार को सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी सफलता हाथ लगी।</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 05:44:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेठी जिला विवाद मामले में बुधवार को मायावती सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी सफलता हाथ लगी। अमेठी को बांटकर छत्रपति साहू जी महाराज नगर नाम का बनाया गया नया जिला फिलहाल बहाल हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने नए जिले के गठन पर रोक लगाने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को रद करते [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अमेठी जिला विवाद मामले में बुधवार को मायावती सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी सफलता हाथ लगी। अमेठी को बांटकर छत्रपति साहू जी महाराज नगर नाम का बनाया गया नया जिला फिलहाल बहाल हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने नए जिले के गठन पर रोक लगाने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को रद करते हुए नए सिरे से सुनवाई के लिए मामला वापस हाईकोर्ट भेज दिया है। अमेठी कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है। अमेठी को बांटकर नया जिला बनाना कांग्रेस और बसपा के बीच राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता के रूप में देखा जा रहा था। न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और न्यायमूर्ति एचएल गोखले की पीठ ने हाईकोर्ट के 18 सितंबर के अंतरिम आदेश को रद करने के उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिला गठित होने या अधिकारियों के कामकाज शुरू करने का हाईकोर्ट में लंबित याचिका की सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। शीर्ष न्यायालय ने हाईकोर्ट को निर्देश देते हुए कहा कि मामले में विचार के दौरान वह अन्य पीठ के 11 अगस्त को दिए आदेश का ध्यान रखेगी। कोर्ट ने कहा कि जब उसी न्यायालय की एक अन्य पीठ 11 अगस्त को समान मुद्दा उठाने वाली एक अन्य याचिका पर अंतिम फैसला दे चुकी है तो न्यायिक अनुशासन के मुताबिक 18 अगस्त को आदेश पारित करते समय इस खंडपीठ को उस आदेश पर ध्यान देना चाहिए था। अगर वह पूर्व पीठ के फैसले से सहमत नहीं थे तो उन्हें मामला बड़ी पीठ को विचार के लिए भेजना चाहिए था। इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार के वकील पीपी राव, सतीश चंद्र मिश्रा और शैल कुमार द्विवेदी ने हाईकोर्ट के अंतरिम रोक आदेश का विरोध करते हुए कहा कि यह आदेश न्यायिक अनुशासन के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। अगर किसी मसले पर उसी न्यायालय की एक पीठ फैसला सुना चुकी है तो दूसरी पीठ उस फैसले को अंतरिम आदेश में नकार नहीं सकती। उन्होंने कहा कि छत्रपति साहू जी महाराज नगर गठन को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका 11 अगस्त को दूसरी पीठ ने खारिज कर दी थी और जिला गठन की 01 जुलाई की राज्य सरकार की अधिसूचना को सही ठहराया था। दूसरी ओर केंद्र सरकार और रजिस्ट्रार जनरल व जनगणना कमिश्नर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने उत्तर प्रदेश की दलीलों का विरोध किया। उनका कहना था कि जनगणना अधिसूचना के मुताबिक जनगणना तक नगर पालिका, जिला तालुका की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।<br />
Reference: Jagran</p>
]]></content:encoded>
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		<title>केन्द्र सीबीआई के जरिये बना रहा दबाव : मायावती</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 05:39:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>

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		<description><![CDATA[बसपा प्रमुख एवं मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को यहां पार्टी नेताओं को अयोध्या प्रकरण, पंचायत चुनाव के साथ सीबीआई के हथकण्डों को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सीबीआई के जरिये उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इसी के तहत सीबीआई ने अदालत में अनुचित हलफनामा दायर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बसपा प्रमुख एवं मुख्यमंत्री मायावती ने बुधवार को यहां पार्टी नेताओं को अयोध्या प्रकरण, पंचायत चुनाव के साथ सीबीआई के हथकण्डों को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार सीबीआई के जरिये उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इसी के तहत सीबीआई ने अदालत में अनुचित हलफनामा दायर किया है, जबकि आयकर विभाग उन्हें दो बार क्लीन चिट दे चुका है। </p>
<p>मायावती ने केन्द्र पर निशाना साधते हुए कहा वह जहां बसपा की छवि खराब करने की साजिश कर रही है वहीं लालू यादव और मुलायम सिंह यादव के प्रति नरमी बरत रही है। इनके खिलाफ सीबीआई मामला चलाने पर जोर नहीं दे रही है परन्तु इसके विपरीत मेरे मामले में तेजी दिखायी जा रही है। वह भी तब जबकि मैंने आज तक ताजमहल को देखा नहीं है। उन्होंने पार्टीजनों से कहा कि विरोधी दलों के ऐसे हथकंडों का मुंहतोड़ जवाब देना होगा। इसके लिए जरूरी है वे अभी से आगामी विधानसभा चुनावों में 300 से अधिक सीटे जीतने का लक्ष्य लेकर जुट जाये। साथ ही बसपा समर्थकों को सीबीआई के हथकंडों से भी अवगत कराये। </p>
<p>अपने आवास पर बैठक में पार्टी के सांसदों, विधायक व पदाधिकारियों को नसीहत देते हुए मायावती ने कहा राज्य में किसी भी समय पंचायत चुनाव घोषित हो सकते हैं। इस बार यह चुनाव &#8216;फ्री सिम्बल&#8217; पर हो रहे हैं। इसलिये इन चुनावों को लड़ाते समय पार्टी के लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। इन चुनावों में पार्टीजन अपनी पसंद के उम्मीदवार को जिताने में जुटे पर वह कहीं भी पार्टी का झंडा, बैनर एवं होर्डिंग या वाल राइटिंग का इस्तेमाल ना करें। बसपा संगठन या सामाजिक भाईचारा कमेटी का कोई पदाधिकारी पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ेगा। यदि कोई पदाधिकारी पंचायत चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन चुनावों में किसी भी क्षेत्र से पार्टी से जुड़े एक से ज्यादा लोग चुनाव लड़ते हैं तो ऐसी स्थिति में पार्टी के सांसद, विधायक, मंत्री तथा पार्टी पदाधिकारी किसी के भी समर्थन में वोट नहीं मांगेंगे। मायावती ने पंचायत चुनावों के चलते 15 सितम्बर तक हर स्तर की कमेटियों के गठन का कार्य फिलहाल रोक दिया है। </p>
<p>मायावती ने निर्देश दिया हर जोन में विधानसभा स्तर पर पूरी तैयारी के साथ &#8216;बढ़ती महंगाई एवं उप्र के प्रति के प्रति केन्द्र सरकार का सौतेला रवैया&#8217; को लेकर धरना प्रदर्शन का तय कार्यक्रम शुरू किया जाये। पंचायत चुनाव के बाद वह स्वयं जिलों के निरीक्षण पर निकलेंगी। किस जिले में वह कब जायेंगी यह गुप्त रखा जायेगा। जो भी अधिकारी सरकार की प्राथमिकताएं पूरी करने में असफल पाया जायेगा उसके खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई करेंगी। </p>
<p>अयोध्या प्रकरण के मालिकाना हक को लेकर अदालत के संभावित फैसले को लेकर भी मायावती ने पार्टी नेताओं को अगाह किया। उन्होंने कहा पार्टी का हर नेता एवं कार्यकर्ता सामाजिक समरसता बनाये रखने में जुटे। लोगों से मिले। उन्हें अयोध्या प्रकरण पर शान्ति बनाये रखने की सलाह दे। पार्टीजन प्रशासनिक मशीनरी का सहयोग करें। </p>
<p>मायावती ने राज्यपाल के बुलावे पर पार्टी सांसदों, विधायकों एवं मंत्रियों को सीधे उनसे मिलने पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा यदि किसी पार्टी नेता को राज्यपाल मिलने के लिये बुलाते हैं तो वह पार्टी के वरिष्ठ लोगों को इसकी जानकारी देगा और वहां से स्वीकृति मिलने पर ही राज्यपाल से मिलने जायेंगे।<br />
Reference: jagran</p>
]]></content:encoded>
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		<title>बीएड धारकों के लिए खुला सीधी भर्ती का रास्ता</title>
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		<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 05:37:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>

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		<description><![CDATA[प्रदेश के लाखों बीएड डिग्री धारक अब सीधे प्राइमरी अध्यापक बन सकेंगे। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने उनकी सीधी भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। प्रदेश में अभी तक यह व्यवस्था थी कि जिन बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी अध्यापक के रूप में नियुक्त करना होता था, उन्हें पहले छह महीने का विशिष्ट बीटीसी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>प्रदेश के लाखों बीएड डिग्री धारक अब सीधे प्राइमरी अध्यापक बन सकेंगे। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने उनकी सीधी भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। प्रदेश में अभी तक यह व्यवस्था थी कि जिन बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी अध्यापक के रूप में नियुक्त करना होता था, उन्हें पहले छह महीने का विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण करना होता था। इसके बाद ही उन्हें प्राइमरी में शिक्षक नियुक्त किया जाता था। </p>
<p>प्रदेश में कुल डायट से प्रतिवर्ष 12 हजार प्रशिक्षित शिक्षक बीटीसी करने के बाद मिल पायेंगे। ऐसे में अध्यापकों की कमी सालों तक भी पूरी नहीं हो पायेगी। बीएड डिग्री धारकों की प्राइमरी अध्यापक के रूप में ही विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से नियुक्तियां बंद कर दी गयी हैं। वहीं, प्रदेश के करीब 1020 बीएड कालेजों से प्रतिवर्ष 1 लाख 17 हजार डिग्री धारक निकलते हैं। </p>
<p>राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने गत 23 अगस्त को अधिसूचना जारी की है। जिसके अनुसार जिन अभ्यर्थियों ने 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीए/बीएससी और बीएड की डिग्री हासिल की है, वह कक्षा एक से लेकर पांच में नियुक्ति के लिए एक जनवरी-2012 तक पात्र होंगे। बशर्ते कि वह अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त छह माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर लें। नियुक्ति मिलने के बाद विशेष प्रशिक्षण पांच साल के अंदर पूरा करना होगा। केंद्र सरकार का प्रयास है कि प्रशिक्षण इग्नू के माध्यम से कराया जाय। एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस प्राइवेट कालेज विधि प्रकोष्ठ के चेयरमैन डा. वीएम सक्सेना का कहना है कि परिषद की अधिसूचना से लाखों बीएड बेरोजगारों को लाभ होगा। </p>
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		<title>सीबीआई खुद खोल रही अपनी स्वायत्तता की पोल</title>
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		<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 07:45:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>MKB</dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>

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		<description><![CDATA[सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर की जांच के मामले में केंद्र सरकार संसद में भले ही सीबीआई की स्वायत्तता का हवाला दे रही हो, लेकिन सीबीआई के अपने कारनामे उसकी स्वायत्तता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। बदलते राजनीतिक समीकरण को देखते हुए अदालत में अपना रुख बदलने के लिए बदनाम रही सीबीआई कई मामलों को [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर की जांच के मामले में केंद्र सरकार संसद में भले ही सीबीआई की स्वायत्तता का हवाला दे रही हो, लेकिन सीबीआई के अपने कारनामे उसकी स्वायत्तता पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। बदलते राजनीतिक समीकरण को देखते हुए अदालत में अपना रुख बदलने के लिए बदनाम रही सीबीआई कई मामलों को तो सालों साल दबाए रहती है। </p>
<p>यही नहीं, जांच की गोपनीयता का हवाला देकर ऐसे मामलों के बारे में वह कुछ भी बताने से इंकार कर देती है। </p>
<p>पूरी जांच करने और तमाम सुबूत जुटाने के बावजूद सीबीआई जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल नहीं कर रही है, उनमें सबसे अहम छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से संबंधित है। जोगी पर 2003 में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों को खरीदने की कोशिश करने का आरोप है। इसके लिए 40 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया। इस खरीदफरोख्त के लिए खुद जोगी टेलीफोन पर बातचीत कर रहे थे, जिसे बाकायदा टेप किया गया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। मई 2004 तक, जब तक केंद्र में एनडीए की सरकार रही, सीबीआई की जांच दुरुस्त रही। इस दौरान न सिर्फ 40 लाख रुपये के स्रोत का पता लगाया लिया गया बल्कि टेप और चिट्ठी को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेज दिया गया। फोरेंसिक जांच से साफ हो गया कि टेलीफोन पर आवाज अजीत जोगी की ही है और चिट्ठी पर दस्तखत भी उन्हीं के हैं। इसके बावजूद सीबीआई ने अजीत जोगी के खिलाफ सात साल बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं की है। </p>
<p>सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार ने किसी भी मामले की जांच पूरी करने के लिए एक साल की समय सीमा निर्धारित कर रखी है। लेकिन राजनीतिक रूप से संवेदनशील कई मामले ऐसे हैं, जिनमें एक साल बाद एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद का मामला इनमें से एक है। लालू प्रसाद पर रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन हड़पने का आरोप है। खुद रेल मंत्री ममता बनर्जी ने पिछले साल इसकी जांच सीबीआई को सौंपी थी। लेकिन आज भी वह इस पर कुंडली मारे बैठी है जबकि राजनीतिक जरूरत के मुताबिक मायावती और मुलायम सिंह यादव के मामले में पाला बदल कर सीबीआई पहले ही बदनाम हो चुकी है।<br />
Reference: jagran</p>
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