अखिलेश और मोदी सरकार का बड़ा अचीवमेंट ढाई महीने में 605 सांप्रदायिक दंगे

अखिलेश और मोदी सरकार का बड़ा अचीवमेंट ढाई महीने में 605 सांप्रदायिक दंगे

उत्तर प्रदेश सांप्रदायिक दंगों से हलाकान है। प्रदेश की कानून व्यवस्‍था चरमरा गई है। प्रदेश सरकार के सवालों से घिरी हुई है। लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से पिछले ढाई महीनों में प्रदेश में 600 दंगे हो चुके हैं।

एक पड़ताल में ये बात सामने आई है कि प्रदेश अधिकांश दंगे, उन इलाकों में हुए हैं जहां विधानसभा उपचुनाव होना है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अगले कुछ महीनो में प्रदेश की 12 विधानसभाओं में उपचुनाव होने हैं और 16 मई के बाद दर्ज दंगों के मामलों में एक तिहाई दंगे इन्हीं इलाकों के आसपास हुए हैं।

समाचार पत्र ने पुलिस रिकार्ड की पड़ताल के बाद दावा किया है कि प्रदेश में भाजपा, सपा और बसपा, तीनों ही दलों ने दो समुदायों के व्यक्तिगत झगड़ों को सांप्रदायिक तनाव में तब्दील करने की कोशिश की।

प्रदेश के जिन इलाकों में दलित और मुस्लिम साथ रहते हैं, उन इलाकों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने के प्रयास किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनावों की घोषणा के बाद 16 मई से 25 जुलाई के बीच 605 झड़पें हुई हैं। ये झड़पें मामूली स्तर की थीं लेकिन पुलिस ने ने इन्हें मामूली माना था।

इन झड़पों में लगभग 200 घटनाएं 12 विधानसभाओं के आसपास हुईं। उन विधानसभाओं के विधायक सांसद बन चुके हैं और यहां आगामी 6 महीनों में विधानसभा उपचुनाव होने ह‌ैं।

ऐसी पांच विधानसभा सीटें-सहारनपुर नागर, बिजनौर, कैराना, ठाकुरवाड़ा और गौतमबुद्धनगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद सबसे अधिक 259 सांप्रदायिक झड़पें हुई हैं।

53 झड़पें अवध क्षेत्र में हुई हैं, वहां की लखनऊ पूर्व की सीट पर विधानसभा चुनाव होना है।

प्रदेश के तराई क्षेत्रों, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड की 12 सीटों पर विधानसभा चुनाव होने हैं। इन क्षेत्रों में क्रमशः 29, 16 और 6 सांप्रदायिक झड़पें हो चुकी हैं।

पड़ताल करने पर ये सामने आया है कि आम तौर 6 कारण सांप्रदाय‌िक झड़पों के लिए जिम्मेदार रहे हैं, जिनमें सबसे अ‌धिक मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान के ‌निर्माण या लाउड स्पीकर के प्रयोग के कारण सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं।

70 मामलों में जमीन विवाद के कारण झड़प हुईं है। 61 झड़पें गौहत्या के कथित आरोप में हुईं।

लड़की भगाने, लड़की छेड़ने और महिलओं या पुरुषों के शोषण के कारण 50 मामले हुए। 30 मामलों में मामूली दुर्घटनाओं के कारण सांप्रदायिक तनाव हुआ।  [Amar Ujala]

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