Tag Archives: Riots in UP

350 दलित परिवारों को भी नहीं मिली मदद

गांव बसी कलां से पलायन कर गांव कमालपुर के रविदास मंदिर पहुंचे 350 दलित परिवारों को गांव वालों की मदद से सांझा चूल्हा बनाकर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की तरफ से कोई मदद न मिलने से दलित नाराज हैं। मंदिर में ही बिशन की पत्नी करीना ने एक बच्चे को जन्म दिया। बीरसैन, विजयपाल, सुनील, ओमप्रकाश, ज्ञानोस ... Read More »

जौली व आसपास के गांवों से हजारों हिन्दुओ का पलायन

सात सितंबर को महापंचायत के बाद से जौली नहर की पटरी पर हुए हिंसा के तांडव के बाद आसपास के गांव में रहने वाले बहुसंख्यक भी पलायन कर गए हैं। परिवार में इक्का-दुक्का लोग रह गए हैं। महिलाएं और बच्चे नहर पर हुए तांडव के बाद सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। आज भी ग्रामीण भयभीत हैं। जौली, तेवड़ा, रुड़कली, ... Read More »

मुख्यमंत्री जी, आपके निकम्मे पन ने मुज़फ़्फरनगर को ‘लाशों के जंगल’ बना दिया

मोहब्बत के शहर को  वोटो के लालच मे आपने शहर को लाशो का जंगल बना दिया अब अपने हाकिमों से लें हालात का जायजा और जानें कि क्यों उठा उन्माद का धुआं और क्यों एक चिंगारी शोला बनकर भड़क उठी। सरकारी ‘तीर’ भी बदलकर देखे और ‘धनुष’ भी, लेकिन.. नतीजा सामने है। घड़ी दुख की है और हालात नाजुक। फिर भी ‘लाशों के ... Read More »

गंगनहर में चार शव और मिले: दंगों के निशां

हिंसा का तांडव थम जाने के बावजूद गंगनहर में शवों के मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। सोमवार को गंगनहर से चार शव और मिले, जिनमें तीन एक साथ जटवाड़ा गंगनहर से बरामद हुए। दो शव जले हुए थे। चौथा शव चित्तौड़ा झाल से मिला है। इसके साथ ही नंगला मंदौड़ की पंचायत के बाद नहर से बरामद हुए ... Read More »

हिंसा पीड़ितों ने जंतर मंतर पर बयां की पीड़ा

मुजफ्फरनगर में हुई हिंसा में अपनों को खोने का दर्द लोगों के चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता था। सगे-संबंधियों को खोने के अलावा हिंसा की आग में अपना सब कुछ गवां बैठे लोगों ने जंतर-मंतर को अपना सहारा बनाया और यहां धरना दिया। मुजफ्फरनगर के कई गांवों से बेदखल होकर आए लोगों ने कहा कि, अब उनके लिए अपने ... Read More »

दंगो की आग मे वोट की रोटी सेकने गये अखिलेश उल्टे पांव भागे

कवाल गांव की बात है। अखिलेश यादव मृतक शाहनवाज के पिता सलीम कुरैशी, चाचा और दो अन्य लोगों से बातचीत कर निकलते हैं। तत्काल ही कई लोग सलीम से कहते हैं, लिस्ट 12 लोगों की थी, सिर्फ चार लोगों को ही क्यों मिलवाया गया? सीएम को सारी बातें बतानी चाहिए थी। सलीम ने कहा, मुझे जितना कहना था, कह दिया। ... Read More »

CM को 47 मौतों के बाद याद आई ‘इंसानियत’

मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हुए सांप्रदायिक दंगों में 47 मौतें हुईं, दहशत और नफरत की आग के शोले भी बुझ चुके हैं। अब मौतों का सिलसिला थम सा गया है और मातम की चीखें भी राजनीतिक भाषणबाजी के बोझ तले सि‌सकियां भर रही हैं। इस दौरान, अचानक अखिलेश सरकार को सौहार्द और इंसानियत की याद आई है। रविवार ... Read More »

भूखे मर जाएंगे पर गांव नहीं लौटेंगे

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष काफी दिनों से अधिकारियों के बेरुखी से नाराज पीड़ितों का सब्र का बांध टूट गया। पीड़ितों ने कहा कि सीएम साहब ट्रॉली नहीं, हमारे मकान जले हैं और इंसान मरे हैं। ये अफसर आपको सही बात नहीं बताएंगे। मुख्यमंत्री साहब, गांव में जाकर देखो, तब पता चलेगा हमारे साथ कितना जुल्म हुआ है। शरणार्थियों ने ... Read More »

अंधाधुंध फायरिंग से एक बार फिर दहला मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्र में पिछले दो दिनों से शांति में एक बार फिर शरारती तत्वों ने जहर घोलने की कोशिश की। पुलिस की सक्रियता से कोई बड़ी घटना नहीं हुई और स्थिति को समय पर काबू कर लिया गया। शामली के फुगाना में शनिवार को खेतों में काम कर रहे किसानों पर एक समुदाय की ओर से अंधाधुंध ... Read More »

गए थे रोजी-रोटी की तलाश में, मिली मौत

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दंगे के शिकार बने ज्यादातर लोग किसान, मजदूर और गरीब तबके के थे। हिंसा वाले दिन ये बेकसूर लोग अपनी रोजी-रोटी की तलाश में निकले थे, लेकिन वापस घर नहीं लौट पाए। किसी की लाश सड़क किनारे मिली तो किसी के शव नहर और खेतों में मिले। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मुजफ्फरनगर और शामली ... Read More »