पुरानी बातो कोफिर से याद किया बहन जी ने

कभी मुख्यमंत्री मायावती की मकान मालकिन और नजदीकी सहेली रहीं डा. दयावती ने सोचा नहीं था कि अचानक इस तरह उनसे मुलाकात हो जाएगी, अगर होगी भी तो वह पहचान जाएंगी। डॉ. दयावती बागपत में जिला कुष्ठ रोग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। सीएचसी के निरीक्षण के दौरान दोनों का आमना-सामना हुआ। उनके नमस्कार करते ही मायावती फौरन उन्हें पहचान गई। निरीक्षण के बीच ही दोनों पुरानी सहेलियों के बीच गुफ्तगू हुई। बहरहाल, सूबे की मालकिन अपनी पुरानी मालकिन को देख कुछ पल के लिए सब कुछ भूल गई।

डॉ. दयावती: नमस्कार

मायावती: नमस्कार, आप यहीं हो?

डॉ.दयावती: जी।

मायावती: कैसी हो?

दयावती: ठीक हूं?

इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ने के बाद रुक गया। कैबिनेट सचिव कार से उतरते हैं और दूसरी ओर खड़े डॉक्टर समूह की तरफ हाथ हिलाकर आने को कहते हैं। सीएमओ डॉ. आर्य आगे बढ़ते हैं।

शशांक सिंह: आप नहीें, डॉ. दयावती

डॉ.दयावती: आप से बहुत बात करनी है?

मायावती: बोलो।

दयावती: मेरा ट्रांसफर नोएडा कर दो, मुझे नोएडा से आने में परेशानी होती है। साथ ही पारिवारिक परेशानी का हवाला दिया।

मायावती: हो गया समझो, एप्लीकेशन कहां है?

दयावती: वो तो अभी नहीं लिखी।

मायावती: एप्लीकेशन डीएम को दे देना, वे उसे मेरे पास पहुंचा देंगे, तुम्हारा ट्रांसफर हो गया।

बकौल दयावती, मायावती ने 1976-78 के दौरान उनके मायके रैदासपुरी, मुजफ्फरनगर में पार्टी गतिविधियों के लिए किराये पर कमरा ले रखा था। उन दिनों मायावती से उनकी अच्छी दोस्ती थी, साथ खाती-सोती थीं, तमाम मुद्दों पर रात भर बातें होती रहती थीं। कुछ दिनों बाद दयावती की शादी नोएडा में हो गयी। मुख्यमंत्री बनने पर लखनऊ जाकर कई बार मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों की पहली मुलाकात है। [Jagran]

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