सपा सरकार मे  यहां दलितों पर टूट रहा दबंगों का कहर, पानी पीने नहीं देते, खिलाते हैं मलमूत्र

सपा सरकार मे यहां दलितों पर टूट रहा दबंगों का कहर, पानी पीने नहीं देते, खिलाते हैं मलमूत्र

झांसी. हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी स्‍टूडेंट रोहित वेमुला के सुसाइड किए जाने का मामला पूरे देश में बड़ा मुद्दा बना हुआ | हम वो 10 मामले बताने जा रहा है, जो दलितों के साथ होने वाले अत्‍याचार को बयां करते हैं। आगे पढ़िए, कौन से हैं 10 मामले…
पहला मामला: 20 जनवरी 2016
बांदा के गांव बिरौना के बाहर दलितों की बस्ती बहला का पुरवा है। यहां एक स्कूल और पास में सरकारी हैंडपंप है। लेकिन कुछ समय पहले इस पर सवर्ण समुदाय के दबंगों ने ताला जड़ दिया, ताकि दलित उसमें से पानी न ले सकें। कुछ यही हाल नरैनी के गुढ़ा कलां गांव का है।

दूसरा मामला: 24 नवंबर 2015
हमीरपुर के बिलगांव के निवासी दलित छिम्मा अहिरवार (90) की मंदिर में घुसने पर हत्या कर दी गई। छिम्‍मा तीर्थ यात्रा करने जा रहा था। जाने से पहले वह स्थानीय मंदिर में चला गया और गांव के ही संजय तिवारी ने उसकी कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। बाद में उसी जगह उसके शव को आग लगा दी।

तीसरा मामला: 27 जून 2015
झांसी के भिटौरा गांव में दलित कुंवरलाल और रामपाल को दबंगों ने जमकर पीटा। साथ ही उनके गुप्तांगों पर हमला किया। उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्‍होंने अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी।

चौथा मामला: 8 जून 2015
रक्सा के ही खैरा गांव में जन्मदिन मनाने और डीजे बजाने पर दलितों को लाठी-डंडों से पीट दिया गया। दलित की गलती सिर्फ इतनी थी कि जब दबंगों ने जन्मदिन के मौके पर डीजे बजाने से मना किया तो उन्‍होंने इसका विरोध कर दिया।

पांचवा मामला: 1 जून 2015
ललितपुर जिले में दलित महिला को गांव के दबंगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए लाठी-डंडों और जूतों से पीट दिया। महिला का कसूर केवल इतना था कि वह रिश्तेदारों के साथ चारपाई पर बैठी थी। लेकिन जब अगड़ी जाति के लोग वहां से गुजरे तो वह चारपाई पर ही बैठी रही।

छठां मामला: मार्च 2015
जालौन के सुरपति गांव में दलित अमर सिंह को बरात के साथ खाना खाने की सजा मिली। दबंगों ने यह कहते हुए अमर की चाकू से नाक काट ली कि दलित होकर साथ में खाना खाने से हमारी नाक कट गर्इ।

सातवां मामला: जुलाई 2015
झांसी के सीपरी बाजार इलाके में काम के बाद मजदूरी मांगने पर दो दलित मजदूरों को बंधक बना लिया गया। बाद में उन्‍हें भैंस के इंजेक्शन लगा दिए गए और करंट भी लगाया गया। इसके अलावा उन्‍हें नग्न करके पीटा गया।

आठवां मामला: 19 सितंबर 2014
रक्सा के ही खैरा गांव में एक दलित युवक सुजान सिंह को मलमूत्र खिलाया गया। इसके पीछे वजह ये थी कि उसने और उसके परिजनों ने सवर्ण जाति के लोगों की जमीन के बगल में प्लॉट खरीद लिया था।आरोपियों ने सुजान के प्राइवेट पार्ट्स पर पेट्रोल छिड़ककर उसकी नाक पर सिगरेट रगड़ दी थी।

नौवां मामला: 30 अप्रैल 2014
झांसी के रक्सा इलाके के रौता ताल में लोकसभा चुनाव की वोटिंग के दिन बुजुर्ग जंगीलाल को मंदिर ले जाकर मूर्ति पर हाथ रखवाकर पूछा गया कि उसने वोट किसे दिया। नहीं बताने पर दलित की मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी।

दसवां मामला: मार्च 2013
हमीरपुर के मुस्कुरा गांव में करीब तीन साल पहले दलित रामस्वरुप बाल कटवाने गया। बाल काटने के दौरान जैसे ही नाई को रामस्वरुप के नाई होने का पता चला, उसे आधे-कटे बालों में ही गाली देते हुए भगा दिया।

क्‍या कहना है सपा के एमएलए का?
झांसी के गरौठा से सपा एमएलए दीप नारायण सिंह का कहना है कि अब गांवों में भी जागरुकता आई है। सपा सरकार ने ऐसे मामलों में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दलितों के साथ अत्‍याचार की घटनाएं होती हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाती है। बांदा के तिंदवारी से एमएलए दलजीत सिंह की मानें तो बुंदेलखंड में लाख कोशिशों के बावजूद छुआछूत जारी है।

औसतन 5 से 6 मामले आते हैं रोज
मीडिया कैंपेनिंग ऑफ दलित ह्यूमन राइट्स के यूपी सेकेटरी राम दुलार कहते हैं कि बुंदेलखंड में रोज दलितों के साथ अत्‍याचार के औसतन 5 से 6 मामले सामने आते हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण ही एससी/एसटी कमीशन ने इलाके को दलितों के लिए संवेदनशील घोषित किया है।

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