‘आजम खां मुसलमानों के दुश्मन

‘आजम खां मुसलमानों के दुश्मन

मुजफ्फरनगर के राहत शिविरों में दंगा पीड़ितों की जगह कांग्रेस व भाजपा के षड्यंत्रकारियों के रहने के सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बयान पर मौलानाओं में नाराजगी है।

मुस्लिम नेताओं ने मुलायम के बयान को पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने वाला बताया है।

उनका कहना है कि सपा मुखिया को यदि लगता है कि राहत शिविरों में षड्यंत्रकारी रह रहे हैं तो उन्हें कमेटी गठित कर इसकी जांच करानी चाहिए।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के महासचिव मौलाना निजामुद्दीन का कहना है कि सपा मुखिया ने यदि इस तरह का बयान दिया है तो यह पूरी तरह से राजनीतिसे प्रेरित है और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने वाला है।

यह बयान हकीकत से ताल्लुक नहीं रखता। सच्चाई ये है कि कैंपों से तमाम लोग अपने घरों को लौट चुके हैं और जो लोग हैं वे मारे डर के नहीं जा रहे हैं। वे आहिस्ता-आहिस्ता जाएंगे।

मौलाना ने कहा कि चिंता तो इस बात की होनी चाहिए कि एक फिरका-दूसरे फिरका से इस हद तक नफरत कैसे करने लगा? प्रयास होना चाहिए इंसाफ का, राजनीति का नहीं।

मौलाना ने कहा कि इतना बड़ा मुल्क बिना मोहब्बत के नहीं रह सकता। राजनीति की जगह मोहब्बत की बात होनी चाहिए।

दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी इस बात पर हैरान हैं कि मुलायम सिंह की ओर से यह बयान आया। उनका कहना है कि ये बयान मुलायम का नहीं हो सकता।

मुलायम ने आजम खां की रिपोर्ट पर यह बयान दिया है। वह कहते हैं कि आजम खां हमेशा मुसलमानों के दुश्मन रहे हैं।

सपा ने आंखें नहीं खोली तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बुखारी ने कहा कि आजम के पास चार वोट नहीं हैं। लेकिन पता नहीं क्यों मुलायम आजम पर भरोसा करते हैं।

अब ये उन्हें तय करना है कि उन्हें मुसलमान चाहिए या आजम? उन्होंने कहा कि मुसलमान कांग्रेस और भाजपा से नाराज हैं। वह सपा को वोट देना चाहता है। पर, मुलायम ने अगर आजम जैसे लोगों पर भरोसा किया तो उन्हें नुकसान होगा।

वह आजम को मंत्रिमंडल से हटाएं। मुलायम सिंह से अपील है कि वे अपने स्तर से शिविरों की जांच करा लें तो पता चल जाएगा कि वहां दंगा पीड़ित लोग ही हैं, जो सर्दी के कारण बहुत परेशान हैं।

उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि मुजफ्फरनगर के राहत शिविरों में तो राहुल को तमाम खामियां मिल गईं पर असोम दंगे के जो पीड़ित राहत शिविरों में रह रहे हैं उनकी हालत के बारे में भी कुछ बताना चाहिए।

आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल को दंगे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

दंगे में जो घर खोता है, मां-बाप, भाई-बहन खोता है उसका दर्द वही समझ सकता है। चुनाव की वजह से मुजफ्फरनगर दंगे पर सियासत नहीं की जानी चाहिए। चुनाव आते-जाते रहेंगे।

यदि सपा मुखिया को लगता है कि राहत शिविरों में दंगा पीड़ित नहीं रह हैं बल्कि भाजपा व कांग्रेस के षडयंत्रकारी रह रहे हैं तो उन्हें एक कमेटी गठित कर उसकी जांच करानी चाहिए। ऐसे लोग हों तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बयानबाजी की जगह इंसानियत की बात होनी चाहिए।  [Amar Ujala]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*